सप्ताह की कहानी

विचारों का परिवर्तन

किसी गाँव में एक कुम्हार चिलम बना रहा था। आठ-दस चिलम बनाने के पश्चात अचानक उसे न जाने क्या सूझा कि वह चाक पर चढी मिट्टी से एक अलग आकृति बनाने लगा। बनाते-बनाते उसने एक सुराही तैयार कर दी और धूप में सूखने के लिए बाकी बनी चिलमों के पास रखकर सुस्ताने चला गया ।

इधर, सुराही के पास वाली चिलम सुराही पर कटाक्ष करते हुए बोली – “कुम्हार के विचारों में परिवर्तन से तो तेरा आकार ही बदल गया, तू बनने तो चिलम जा रही थी लेकिन सुराही बन गई।”

तब सुराही अत्यंत सहज भाव से बोली – “कुम्हार के विचारों में परिवर्तन से न सिर्फ मेरा आकार बल्कि मेरा तो समस्त संसार ही बदल गया।” चिलम ने उत्सुकता से पूछा, “भला ! वह कैसे ?”

सुराही ने उत्तर दिया, “यदि मैं चिलम बनती तो अवश्य ही किसी नशेबाज के हाथों में रहती। वह मुझमें तंबाकू भरकर फूँकता तो अपना भी नाश करता व अन्य लोगों तथा वातावरण को भी हानि पहुँचाता। और मुझमें एक प्रकार की अकङ भी समाहित रहती। लेकिन अब मैं सुराही बन गई हूँ, मुझमें जल भरा जाएगा जो प्यासे व्यक्तियों की प्यास को शांत करेगा और इस जल को प्रदान करने के लिए मुझे झुकना (विनम्र होना) पङेगा, तभी मैं इस संसार में सम्मान व यश प्राप्त करने के लायक हो सकूँगी। इसीलिए कुम्हार के विचारों में परिवर्तन से मेरा सम्पूर्ण  संसार बदल गया।”

यह सुनकर चिलम निरुत्तर हो गई...।

 

संकलित

 

नोट : यह रचना किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं है, यदि इसका संबंध किसी व्यक्ति, स्थान अथवा वस्तु से है तो वह केवल एक संयोग मात्र होगा ।